सिन्धु घाटी सभ्यता और वैदिक सभ्यता महत्वपूर्ण तथ्य
सिन्धु घाटी सभ्यता :- सिन्धु सभ्यता की खोज :- रायबहादुर दयाराम साहनी, सन् 1921 में सिन्धु सभ्यता के मुख्य निवासी द्रविड़ व भूमध्यसागरीय थे। सिन्धु सभ्यता एक नगरीय सभ्यता थी। सिन्धु सभ्यता का मुख्य बंदरगाह लोथल था सिन्धु सभ्यता की लिपि भावात्मक (चित्रात्मक) थी। इसे हड़प्पा सभ्यता भी कहते है। सिन्धु सभ्यता में घरों तथा नगर को बनाने के लिए ग्रिड पद्धति अपनाई गई थी। सैंधववासी मिठास के लिए शहद का प्रयोग करते थे। सैंधववासी दशमलव प्रणाली पर आधारित बांट का प्रयोग करते थे। सिन्धु घाटी सभ्यता के विनाश का कारण बाढ़ को माना जाता है। सिन्धु समाज मातृसत्तात्मक था। भारत का सबसे प्राचीन नगर मोहनजोदड़ो था, जिसे मृतकों का टीला कहा जाता है। मोहनजोदड़ो से प्राप्त सबसे बड़ी इमारत अन्नागार है। मोहनजोदड़ो से एक कांस्य कि मुर्ति नर्तकी मिली है। मोहनजोदड़ो स्थल से एक अद्भुत निर्माण विशाल स्नानागार के साक्ष्य मिले हैं। मोहनजोदड़ो को सिन्ध का बाग कहते है। कालिबंगा का अर्थ काली चूड़ियां। नकाशीदार ईंटों का प्रयोग कालिबंगा में हुआ था। अग्निकुंड लोथल व कालिबंगा से प्राप्त हुए। जुते हुए खेत के साक्ष्य कालिबंगा ...